ज़कात — आत्मा की पवित्रता और समाज की समृद्धि का महान प्रणाली
ज़कात — आत्मा की पवित्रता और समाज की समृद्धि का महान प्रणाली इस्लाम एक पूर्ण जीवन-पद्धति है, जो मनुष्य के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को संवारता है। इसी व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है ज़कात, जो केवल एक धार्मिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट आर्थिक व्यवस्था भी है। “ज़कात” शब्द का अर्थ है पवित्रता और वृद्धि। अर्थात ज़कात देने से धन शुद्ध होता है और उसमें बरकत (वृद्धि) होती है। ज़कात की अनिवार्यता और महत्त्व ज़कात इस्लाम के पाँच मूल स्तंभों में से एक है। पवित्र क़ुरआन में बार-बार नमाज़ के साथ ज़कात का उल्लेख किया गया है: "नमाज़ कायम करो और ज़कात अदा करो।" यह आयत स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि ज़कात का महत्व नमाज़ के समान ही है। जो लोग ज़कात नहीं देते, उनके लिए कड़ी चेतावनी भी दी गई है: "जो लोग सोना-चाँदी जमा करके रखते हैं और उसे अल्लाह के मार्ग में खर्च नहीं करते, उन्हें दर्दनाक यातना की सूचना दे दो।" हदीस के अनुसार ज़कात पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया: "इस्लाम की नींव पाँच चीज़ों पर है: इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, नमाज़ क...