ज़िलहिज्जा का महीना: कुर्बानी, हज और इंसानियत का पैग़ाम
🕋 ज़िलहिज्जा का महीना: कुर्बानी, हज और इंसानियत का पैग़ाम इस्लाम में कुछ महीने ऐसे होते हैं जिनकी फज़ीलत (महत्ता) बहुत ज़्यादा होती है। उन्हीं में से एक है ज़िलहिज्जा का महीना। यह महीना सिर्फ़ एक इस्लामिक कैलेंडर का आख़िरी महीना ही नहीं, बल्कि इबादत, त्याग, कुर्बानी और इंसानियत का एक महान पैग़ाम लेकर आता है। इस महीने में हज अदा किया जाता है, और दुनियाभर के मुसलमान ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के मौके पर कुर्बानी करते हैं। यह महीना हमें सिर्फ़ रस्में निभाने का नहीं, बल्कि अपनी ज़िंदगी को सुधारने और अल्लाह से अपने रिश्ते को मज़बूत करने का मौका देता है। 🌙 ज़िलहिज्जा की अहमियत इस्लाम में चार महीने ऐसे हैं जिन्हें “अशहुरे हुरुम” यानी सम्मानित महीने कहा गया है, और ज़िलहिज्जा उनमें से एक है। इस महीने की पहली दस तारीख़ें खास तौर पर बहुत ही बरकत वाली होती हैं। हदीस में आता है कि: “इन दस दिनों में किए गए नेक काम अल्लाह को सबसे ज़्यादा पसंद हैं।” इसका मतलब यह है कि नमाज़, रोज़ा, ज़िक्र, दुआ और सदक़ा—हर नेक काम का सवाब इन दिनों में कई गुना बढ़ जाता है। 🕋 हज: एक रूहानी सफर ज़िलहिज्जा का सबसे बड़ा अमल है ...