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कुर्बानी: सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि अपने नफ़्स की इस्लाह का पैग़ाम

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🌙 कुर्बानी: सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि अपने नफ़्स की इस्लाह का पैग़ाम कुर्बानी हमें सिर्फ जानवर ज़बह करना नहीं सिखाती, बल्कि अल्लाह की इताअत, नफ़्स की इस्लाह, ईसार, अख़लास और इंसानियत की ख़िदमत का सबक देती है। इस आर्टिकल में जानिए कुर्बानी की असल रूह और ज़िंदगी बदल देने वाली सीख। 🕊️ भूमिका (Introduction) कुर्बानी का नाम सुनते ही हमारे ज़ेहन में जानवर ज़बह करने की तस्वीर आती है, लेकिन हक़ीक़त इससे कहीं ज़्यादा गहरी है। कुर्बानी एक ऐसी इबादत है जो हमें हर पहलू में अल्लाह की इताअत, अख़लास और ईसार का सबक देती है। अगर हम सिर्फ जानवर ज़बह करके समझ लें कि हमने कुर्बानी पूरी कर ली, तो हम इसके असल मक़सद को नहीं समझ पाए। 🐪 कुर्बानी की असल रूह क्या है? अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है: “न उनके गोश्त अल्लाह तक पहुंचते हैं और न उनका खून, बल्कि उस तक तुम्हारा तक़वा पहुंचता है।” इस आयत से साफ़ पता चलता है कि कुर्बानी का असल मक़सद तक़वा (अल्लाह का डर और परहेज़गारी) हासिल करना है। 🔥 हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी हज़रत इब्राहीम (अ.स.) का वाक़िया हमें सिखाता है कि अल्लाह के हुक्म ...