मौजूदा हालात में इस्लाम का पैग़ाम: इंसानियत, सब्र और एकता की ज़रूरत
मौजूदा हालात में इस्लाम का पैग़ाम: इंसानियत, सब्र और एकता की ज़रूरत आज का दौर इंसानियत के लिए एक बड़ा इम्तिहान बन चुका है। हर तरफ बेचैनी, नफरत, महंगाई, बेरोज़गारी, और आपसी टकराव का माहौल दिखाई देता है। हमारा देश भारत, जो हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे और विविधता में एकता की मिसाल रहा है, आज कई सामाजिक और नैतिक चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे वक्त में इस्लाम का पैग़ाम सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक रहनुमा की तरह है। इस्लाम: अमन और इंसाफ का दीन इस्लाम शब्द ही “सलामती” से निकला है, जिसका मतलब है शांति। अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है: “निस्संदेह, अल्लाह इंसाफ और भलाई का हुक्म देता है…” (सूरह नहल: 90) यह आयत साफ बताती है कि इस्लाम का बुनियादी पैग़ाम इंसाफ, अच्छाई और दूसरों के साथ भलाई करना है। आज जब समाज में नाइंसाफी और भेदभाव बढ़ रहा है, तो हर मुसलमान का फर्ज है कि वह इस्लाम की असली तालीम को अपनाए और दूसरों तक पहुंचाए। नफरत के दौर में मोहब्बत का पैग़ाम आज सोशल मीडिया और राजनीति के जरिए लोगों के दिलों में नफरत भरी जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और...