रमज़ान महिने की फजीलत एवं अहमियत
अल्लाह रब्बुल आलमीन के फजल-करम से माहे रमजान उल मुबारक का आरंभ हो चुका है। इसलिए हम सबको अल्लाह रब्बुल आलमीन का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने हमें जिंदगी में एक बार फिर यह मुबारक महीना नसीब फरमाया। एक ऐसा महीना के जिसमें अल्लाह रब्बुल आलमीन जन्नत के दरवाजे खोल देता है। जहन्नम के दरवाजे बंद कर देता है। और शैतान को जकड़ देता है। ताकि वह अल्लाह के बंदों को इस तरह गुमराह ना कर सके जिस तरह आम दिनों में करता है। ऐसा महीना के जिसमें अल्लाह रब्बुल आलमीन सबसे ज्यादा अपने बंदों को जहन्नम से आजादी का उपहार देता है। जिसमें खुसूसी तौर पर अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत करता और उनकी तोबा और दुआएं कुबूल करता है। तो ऐसे अजीमुश्शान महीने का पाना यकीनन अल्लाह रब्बुल आलमीन की बहुत बड़ी नियमत है। और इस नियमत की प्रतिष्ठा का अंदाजा आप इसी बात से कर सकते हैं कि सलफ-सालेहीन रहेमाहुमुल्लाह 6 माह तक यह दुआ करते थे कि अल्लाह हमें रमजान उल मुबारक का महीना नसीब फरमा। फिर जब रमजान उल मुबारक का महीना गुजर जाता तो वह इस बात की दुआ करते कि या अल्लाह हमने इस महीने में जो इबादत की तू उन्हें कुबूल फरमा। क्योंकि वह...